बिखरता भारत
Poem Collection
- बिखरता भारत
- गांधी जी का देश
- इतिहास चुप है
- माँ तू जा रही हो
- भावना
बिखरता भारत
था एक दिन जवना ऐसा
सोने की चिड़ियाँ कहलाती थी।
मुगलों ने लुटा ही लुटा
अंग्रेज कहाँ रहा इससे अछूता।
कोई कहता पंजाब हमारा
कोई कहता आसाम।
कोई कहता उत्तरा खण्ड हमारा
कोई कहता झारखण्ड।
आज़ादी की कीमत मंहगी थी
शहीदों ने ख़रीदा था देकर खून।
लटक गए फांसी के फंदे
भारत माँ के प्यारे बन्दे।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई
सबों ने मिलकर लड़ी लड़ाई।
मेरा भारत बिखण्डित होगा।
सुभास भगत की सहिद भूमि है
बुद्ध महावीर गांधी की तपो धरा।
गुप्त दिनकर पंत का यहाँ न होगा अन्त
चाहे गुजर जाये कितने बसन्त।

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